टेराकोटा , गोरखपुर
                
पत्थरनुमा पात्र
यह शीशे जैसे पारदर्शी पात्र सफेद या रंगीन मिटटी से बने होते है। सफेद पात्रों को अधिकतर पोरसलीन के लेप द्वारा चमक दी जाती है परन्तु रंगीन पात्रों को चमकाने के लिए नमक का प्रयोग किया जाता है। यह पात्र आमतौर पर चूना मिटटी फायर क्ले से बनाये जाते हैं परन्तु कुछ आधुनिक नमूने सफेद मिटटी को तपाकर शीशे की तरह चमक देते हुए बनाये जाते हैं।

मिटटी की कला को ध्यान मेें रखते हुए इन सभी कृतियों को पत्थरनुमा स्टोल वेयर, कृतियां कहा जा सकता है जिनकी शीशे जैसी चमक और आकृति है जो छिद्रमयता और प्रवेष्ठा से परे है। ऐसी कृतियों में छिद्रमयता पानी सोखने की शकित 3 प्रतिशत के अन्दर होती है। पत्थरनुमा पात्रों को प्राृतिक कच्चा माल के प्रयोग के आधार पर दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।

(क) कोमल व सुन्दर पत्थरनुमा पात्र : इस श्रेणी में घरों में इस्तेमाल होने वाले बर्तन और रसायनिक उधोग में तेजाब प्रभावरहित पात्र आते है। इन पात्रों में प्रयोग की जाने वाली मिटटी को पहले शुद्ध कर लिया जाता है जो अच्छी क्षमता वाली होती है।

(ख) खुर्दरा व असामान्य पत्थरनुमा पात्र व वस्तुएँ : ये पात्र और वस्तुएँ बिना धुली व शुद्ध की हुर्इ मिटटी से बनाये जाते हैं। अनेक काम में आने वाली टाइलें इस श्रेणी में आती है।


स्वास्थ्य सम्बन्धी पात्र :
आजकल स्वास्थ्य सम्बन्धी पात्र चीनी मिटटी के बने पोरसलीन पात्रों जैसे बनाये जाते हैं। प्राचीन काल में घटिया किस्म की मिटटी से बनाये व पकाये जाते थे। जिन्हें रंगीन द्रव्यों को छुपाने के लिए सतह पर सफेद लेप लगाया जाता था।

रिफरैक्ट्री मजबूत मिटटी से बनी चीजें :
यह वस्तुएँ ज्वलनशील मिटटी या तीव्र गर्मी अवरोधक पदार्थों से बनती हैं। इन्हें बनाने के लिए बहुत ऊँचे तापमान पर पकाया जाता है और इन्हें छि्रमय तथा चमक रहित रहने दिया जाता है। यह भटिठयों को बनाने में इस्तेमाल होती हैं। जहाँ धातुओं व शीशे वगैरह को पिघलाया जाता है। आमतौर पर किसी भी पदार्थ को रिफरैक्ट्री नहीं कहा जा सकता जो 1450 से 1600 सेलियसयस नीचे तापमान पर पदार्थ को पिघलाने का का संकेत दें। अर्थात ऊँचे तापमान पर पकाया जाता है।

पारसलीन चीनी मिटटी
इस श्रेणी में सफेद, अप्रवेशीय मिटटी के चमकदार, पर्याप्त पतले औरअद्र्ध पारदशी पात्र आते है। यह पात्र सदैव शुद्ध सफेद चीनी मिटटी से बनते हैं जिन्हें ऊँचे तापमान पर 1300 सेलिययस से अधिक पर कांचनुमा बनाया जाता है। पोरसलीन तीन भागों में बांटा जा सकता है।

1. ठोस या शातुनुा पदार्थ फेलसपाकर पोरसलीन
2. कोमल या शीशेनुमा चमकदार
3. बोन चाइना।
 
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